Indic Today खगोल, धातु, प्रकाशिकी विज्ञान के वैश्विक इतिहास तथा भारत के वर्णमाला लेखन और ज्ञान प्रणालियों के इतिहास के लिए निरुक्त का महत्व

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Megh Kalyanasundaram

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निरुक्त की रचना का श्रेय आचार्य यास्क को जाता है। यास्क नाम पाणिनि की अष्टाध्यायी में प्रमाणित है। कल्याणसुंदरम (2020ए) के तालिका एक (कल्याणसुंदरम 2020ए:12-15) में निरुक्त की शताब्दी पर कुछ विचारों का सर्वेक्षण है । कल्याणसुंदरम (2020बी) के पृष्ठभूमि नामक उपखंड (कल्याणसुंदरम 2020बी 2-3) में स्पष्टीकरण है कि यह विचार करना अकादमिक रूप से अनुचित क्यों नहीं है कि निरुक्त छठी शताब्दी ईसा पूर्व या उससे पहले का था।

उपरोक्त पृष्ठभूमि के साथ, आइए अब हम खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान और प्रकाशिकी विज्ञान के वैश्विक इतिहास तथा भारत के वर्णमाला लेखन और ज्ञान प्रणालियों के इतिहास के लिए निरुक्त के महत्व को देखें।

  1. खगोल विज्ञान: डैनियल ग्राहम [Daniel Graham] ने “हेलिओफोटिज्म” [Heliophotism] की खोज का श्रेय परमेनाइड्स को दिया है[1] । स्टैनफोर्ड इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फिलॉसफी (Stanford Encyclopedia of Philosophy) के अनुसार परमेनाइड्स [Parmenides] पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के शुरुआती भाग में सक्रिय थे[2]। लेकिन छठी शताब्दी ईसा पूर्व (या उससे पहले) निरुक्त “हेलिओफोटिज्म” (Heliophotism) के बारे में जागरूकता की पुष्टि करता है[3]। अधिक विवरण के लिए कल्याणसुंदरम (2020ए) में पृष्ठ 1-10 देखें।
  1. धातु विज्ञान: टेरेंस बेल [Terrence Bell] का मत है कि कुप्रो निकेल {सफेद तांबा} [Cupro Nickel {White Copper}] का पहला ज्ञात उपयोग 300 ईसा पूर्व में चीन में हुआ था[4]। लेकिन छठी शताब्दी ईसा पूर्व (या उससे पहले) निरुक्त “कंसं”[5] शब्द की पुष्टि करता है जिसे सरूप ने सफेद तांबे के रूप में अनुवादित किया है। अधिक विवरण के लिए कल्याणसुंदरम (2020बी) में पृष्ठ 4-8 देखें।
  1. प्रकाशिकी विज्ञान: एंड्रयू एन शेरवुड [Andrew N Sherwood] के पुस्तक में[6] (और अन्य शोध पत्रों मैं भी[7]) “बर्निंग ग्लास” [“Burning glass”] की खोज का श्रेय अरिस्टोफेन्स [Aristophanes] को दिया गया है। यह खोज ईसा पूर्व की मानी जाती है। लेकिन छठी शताब्दी ईसा पूर्व (या उससे पहले) निरुक्त “बर्निंग ग्लास” [“Burning glass”] की जागरूकता की पुष्टि करता है[8]। अधिक विवरण के लिए कल्याणसुंदरम (2020बी) में पृष्ठ 3-4 देखें।
  1. भारत में वर्णमाला लेखन का इतिहास: डोमिनिक वुजास्तिक [Dominik Wujastyk] और कुछ अन्य लोगों के अनुसार साउथ एशिया [South Asia] में “वर्णमाला लेखन” (alphabetical writing) तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में शुरू हुआ था[9]। लेकिन छठी शताब्दी ईसा पूर्व (या उससे पहले) निरुक्त “ग्रन्थं”[10] शब्द को प्रमाणित करता है। अधिक विवरण के लिए कल्याणसुंदरम (2020ए) में पृष्ठ 20-21 देखें।
  1. भारतीय ज्ञान प्रणालियों का इतिहास: छठी शताब्दी ईसा पूर्व (या उससे पहले) निरुक्त “विद्यास्थानं”[11] और “व्याकरण”[12] तथा वेदांग[13] शब्दों को प्रमाणित करता है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व (या उससे पहले) में इन शब्दों के सत्यापन का महत्व स्वयं स्पष्ट होना चाहिए।

उपरोक्त बिंदुओं से खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान और प्रकाशिकी विज्ञान के वैश्विक इतिहास और भारत के वर्णमाला लेखन और ज्ञान प्रणालियों के इतिहास के लिए निरुक्त का महत्व स्पष्ट होना चाहिए। जहाँ तक मैं देख पाया हूँ, कल्याणसुंदरम (2020 ए, बी) से पहले किसी भी प्रकाशन ने उपर्युक्त तुलनात्मक विश्लेषणों के आधार पर उपर्युक्त मामलों को प्रस्तुत नहीं किया है [14]

ग्रन्थसूची

Bag, AK. 1997. History of Technology in India (Vol I): From Antiquity to C. 1200 A.D. Edited by AK Bag. 1st ed. Vol. 1. New Delhi: Indian National Science Academy. https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.205662/page/n5/mode/1up?view=theater.

Bell, Terrence. 2018. “What Is Cupronickel?” ThoughtCo. May 12, 2018. https://www.thoughtco.com/metal-profile-cupronickel-2340116.

Graham, Daniel W. 2013. Science before Socrates : Parmenides, Anaxagoras, and the New Astronomy. Oxford, New York: Oxford University Press.

Kalyanasundaram, Megh. 2020a. “Reading Yāska’s Nirukta in 2020: Jottings of Consequence to the Global History of Astronomy, Yāska’s Chronological Epoch and the Indic History of Writing and Knowledge Systems.” Academia. July 2020. https://www.academia.edu/43694407/R...ndic_history_of_writing_and_knowledge_systems.

———. 2020b. “A Case for a Place for Yāska’s Nirukta in Inclusive Global Histories of Technology, Science, Gender Equality in Inheritance and an Argument of Consequence to the Chronology of Some Smṛti Texts.” Prachi Prajna 6 (11).

Palmer, John. 2016. “Parmenides (Stanford Encyclopedia of Philosophy).” Stanford.edu. 2016. https://plato.stanford.edu/entries/parmenides/.

Sarup, Lakshman. 1967. THE NIGHAṆṬU and the NIRUKTA: The Oldest Indian Treatise on Etymology, Philology and Semantics [Text, Introduction, English Translation and Notes]. 2nd reprint. Delhi: Motilal Banarsidass.

Sherwood, Andrew N. 2003. Greek and Roman Technology: A Sourcebook Annotated Translations of Greek and Latin Texts and Documents. Routledge.

Subbarayappa, B V. 2013. Science in India: A Historical Perspective. New Delhi: Rupa Publications.

Wujastyk, Dominik. 2014. “Indian Manuscripts.” In Manuscript Cultures: Mapping the Field, edited by Jörg Quenzer, Dmitry Bondarev, and Jan-Ulrich Sobisch. Berlin; Boston: De Gruyter. https://www.degruyter.com/document/doi/10.1515/9783110225631/html?lang=en.

[1] (Graham 2013:109)

[2] Palmer (2016) https://plato.stanford.edu/entries/parmenides/

[3] 2.6 “अथाप्यस्यैको रश्मिश्चंद्रमसं प्रति दीप्यते तदेतेनोपेक्षितव्यम् । आदित्यतोऽस्य दीप्तिर्भवति । सुषुम्णः सूर्यरश्मिश्चन्द्रमा गन्धर्वः” (Sarup 1967:25)

2.6 “Moreover a ray of the sun illuminates the moon. That the illumination of the moon is caused by the sun is to be established by the following: Suṣumṇa is the ray of the sun, the moon is the holder.” (Sarup 1967:25)

[4] Bell (2018) https://www.thoughtco.com/metal-profile-cupronickel-2340116

[5] 7.23 “उदीचि प्रथमसमावृत्त आदित्ये कंसं वा मणिं वा परिमृज्य प्रतिस्वरे यत्र शुष्कगोमयमसंस्पर्शयन् धारयति तत्प्रदीप्यते” (Sarup 1967:144) [Emphasis added]

7.23 “The sun having first revolved towards the northern hemisphere, a person holds a polished (piece of) white copper, or crystal, focusing the sun-rays in a place where there is some dry cow-dung,without touching it: it blazes forth, and this very (terrestrial) fire is produced.” (Sarup 1967:125) [Emphasis added]

[6] (Sherwood 2003:25)

[7] https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/B0080431526011372?via=ihub

[8] 7.23 “उदीचि प्रथमसमावृत्त आदित्ये कंसं वा मणिं वा परिमृज्य प्रतिस्वरे यत्र शुष्कगोमयमसंस्पर्शयन् धारयति तत्प्रदीप्यते” (Sarup 1967:144) [Emphasis added]

7.23 “The sun having first revolved towards the northern hemisphere, a person holds a polished (piece of) white copper, or crystal, focusing the sun-rays in a place where there is some dry cow-dung, without touching it: it blazes forth, and this very (terrestrial) fire is produced.” (Sarup 1967:125) [Emphasis added]

[9] “Although writing was probably known to exist outside India before Aśoka, it has been compellingly argued that Aśoka created the first alphabetical writing specific to South Asia, in order to promulgate his edicts.” (Wujastyk 2014:163)

[10] 1-20 “उपदेशाय ग्लायम्तोऽवरे बिल्मग्रहणायेमं ग्रन्थं समांनासिषुः” (Sarup 1967:42) [Emphasis mine]

[11] “तदिदं विद्यास्थानं व्याकरणस्य…” (Sarup 1967:37)

[12] Ibid.

[13] “वेदं च वेदाङ्गानि च” (Sarup 1967:42)

[14] उदहारण के लिए आप Subbarayappa (2013) या Bag (1997) देखिए। इनमें से किसी भी पुस्तक में निरुक्त के इन पहलुओं का कोई उल्लेख नहीं है

Feature Image Credit: istockphoto.com

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